पिछले कुछ समय में सोने और चांदी की कीमतों ने दुनिया भर के आर्थिक विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है। कीमतों के इस ‘बुल रन’ के पीछे की कहानी केवल गहनों की मांग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार ग्लोबल पॉलिटिक्स और आधुनिक तकनीक से जुड़े हैं।
1. ‘फिएट करेंसी’ पर बढ़ता अविश्वास
जब दुनिया की प्रमुख मुद्राएं (जैसे डॉलर या यूरो) अस्थिर होती हैं, तो सोने को ‘अल्टीमेट करेंसी’ माना जाता है। निवेशक और सरकारें कागजी नोटों के बजाय ऐसी संपत्ति पर भरोसा करते हैं जिसकी अपनी एक भौतिक वैल्यू हो। यही कारण है कि केंद्रीय बैंक भारी मात्रा में गोल्ड रिजर्व जमा कर रहे हैं।
2. ब्याज दरों का ‘रिवर्स’ कनेक्शन
वैश्विक बैंकों की मौद्रिक नीतियां सोने के दाम तय करने में बड़ी भूमिका निभाती हैं। जब ब्याज दरें स्थिर होती हैं या घटने की उम्मीद होती है, तो बॉन्ड और फिक्स्ड डिपॉजिट जैसे विकल्पों से मिलने वाला मुनाफा कम हो जाता है। इसका सीधा फायदा सोने और चांदी को मिलता है क्योंकि लोग वहां अपना फंड शिफ्ट करने लगते हैं।
3. चांदी: भविष्य की ‘इंडस्ट्रियल’ चाबी
चांदी के दाम बढ़ने का एक बड़ा कारण इसकी औद्योगिक उपयोगिता (Industrial Utility) है। आज की ग्रीन-एनर्जी क्रांति (जैसे सोलर पैनल) और सेमीकंडक्टर चिप्स के निर्माण में चांदी अनिवार्य है। चूंकि चांदी की खदानें सीमित हैं और मांग हर दिन बढ़ रही है, इसलिए इसके दाम सोने के मुकाबले ज्यादा तेजी से उछल रहे हैं।
4. भू-राजनीतिक अस्थिरता (Geopolitical Risk)
दुनिया के किसी भी कोने में तनाव होने पर सप्लाई चेन बाधित होती है। ऐसी अनिश्चितता के माहौल में सोना एक ‘सेफ हेवन’ के रूप में उभरता है, जो किसी भी देश की सीमा या राजनीति से ऊपर है।
Market Pulse (Current Estimated Stats):
आज के ताजा भाव (30 जनवरी 2026)
| धातु | शुद्धता/मात्रा | आज की कीमत (लगभग) | कल से बदलाव |
| सोना (24K) | प्रति 10 ग्राम | ₹1,67,500 – ₹1,70,800 | ↓ ~₹8,000 की गिरावट |
| सोना (22K) | प्रति 10 ग्राम | ₹1,53,500 – ₹1,56,500 | ↓ ~₹7,500 की गिरावट |
| चांदी (Silver) | प्रति 1 किलोग्राम | ₹3,85,000 – ₹3,95,000 | ↓ ~₹15,000 की गिरावट |
निष्कर्ष: सोने और चांदी के बढ़ते दाम इस बात का संकेत हैं कि वैश्विक अर्थव्यवस्था इस समय एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है, जहाँ सुरक्षा और तकनीक सबसे ऊपर हैं।